स्थायी पर्यटन के विकास से संबंधित उपाय

नयी दिल्ली: पर्यटन मंत्रालय ने गंतव्य आधारित क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यटन स्थलों और गंतव्य स्थानों के पास रहने वाले स्थानीय लोगों व सेवा प्रदाताओं को प्रशिक्षित करना, विकास करना, संवेदनशील बनाना और सेवाओं/प्रशिक्षणों को उन लोगों के घरों तक पहुंचाना है, जो प्रशिक्षण लेने के लिए शहरों/कस्बों की यात्रा करने में सक्षम नहीं हैं।
अब तक इस पहल के तहत 12,000 से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया है और पूरे देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर 150 से अधिक ऐसे प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं। पर्यटन मंत्रालय ने भारत को स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से टिकाऊ पर्यटन के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति तैयार की है।
स्थायी पर्यटन के विकास के लिए निम्नलिखित रणनीतिक स्तंभों को चिह्नित किया गया है:
पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देना, जैव विविधता की रक्षा करना
आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देना, सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिरता को बढ़ावा देना,स्थायी पर्यटन के प्रमाणीकरण पर योजना, आईईसी और क्षमता निर्माण और शासन।
स्थायी पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीति के कार्यान्वयन में सहायता करने के लिए मंत्रालय ने भारतीय पर्यटन और यात्रा प्रबंधन संस्थान (आईआईटीटीएम) को केंद्रीय नोडल एजेंसी- स्थायी पर्यटन (सीएनए-एसटी) के रूप में नामित किया है।
आतिथ्य सत्कार सहित घरेलू संवर्धन और प्रचार योजना के तहत पर्यटन मंत्रालय मेलों/त्यौहारों और पर्यटन से संबंधित कार्यक्रमों (यानी सेमिनार, सम्मेलन, अभिसमय आदि) के प्रस्ताव पर राज्य सरकारों को 50 लाख रुपये तक और केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन को 30 लाख रुपये तक की केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) प्रदान करता है।
इस योजना में निम्नलिखित घटक शामिल हैं:-
i. अर्द्ध-स्थायी संरचनाओं का निर्माण
ii. पोस्टर, पैम्फलेट, समाचार पत्र के माध्यम से विज्ञापन और फिल्म का निर्माण
iii. कलाकारों का पारिश्रमिक
iv. बैठने की व्यवस्था, प्रकाश की व्यवस्था, ध्वनि, आवास व बोर्डिंग, परिवहन, स्थान किराए पर लेना और इसी तरह की अन्य गतिविधियां
इस योजना दिशानिर्देशों में पर्यटकों को स्थानीय पर्व और सांस्कृतिक मेलों को देखने के लिए विशेष व्यवस्था और सुरक्षा प्रदान करने का कोई विशिष्ट प्रावधान नहीं है। हालांकि, राज्य सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पर्यटकों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती हैं।
पर्यटन मंत्रालय (एमओटी) देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर पर्यटन संबंधी बुनियादी ढांचे की उपलब्धता और सुविधाएं प्रदान करने के लिए “स्वदेश दर्शन”, “तीर्थयात्रा कायाकल्प और आध्यात्मिक संवर्द्धन अभियान” यानी प्रसाद और “केंद्रीय एजेंसियों को सहायता” योजनाओं के तहत राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन/केंद्रीय एजेंसियों को विकास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
पर्यटन मंत्रालय राज्य पर्यटन विभागों को पर्यटक सूचना और सुविधा में सुधार के साथ-साथ अपने पर्यटक उत्पादों के विपणन व प्रचार-प्रसार को लेकर प्रमुख आईटी पहल करने के लिए प्रोत्साहित करता है। इसके तहत मंत्रालय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को केंद्रीय वित्तीय सहायता प्रदान करता है, जिससे वे अपने पर्यटन उत्पादों व सेवाओं में प्रचार-प्रसार, विपणन आदि सहित सूचना प्रौद्योगिकी के व्यापक उपयोग को अपना सकें। इस योजना के तहत आईटी परियोजना (राज्यों या केंद्रशासितप्रदेशों की) की लागत का 50 फीसदी हिस्सा वित्तीय सहायता के रूप में राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों को दी जाती है, जो हर एक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के लिए एक वार्षिक सीमा निर्धारित की गई है, जो कुल परियोजना लागत का 90 फीसदी या 50 लाख रुपये (जो भी कम हो) होगा।
यह जानकारी आज लोकसभा में केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने दी।

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