एडुसैट से भी होगी गोवा में नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गतिविधियां / इस बावत मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत ने की इसरो अधिकारियों से मुलाकात

पोरवोरिम : जीसैट-3, जो एडुसैट के रूप में जाना जाता है, पाठशाला स्तर से उच्च शिक्षा तक सुदूर शिक्षा के लिए बना है। यह पहला समर्पित “शिक्षा उपग्रह” है जो देश भर में शैक्षणिक सामग्री के संवितरण के लिए कक्षा को उपग्रह आधारित दोतरफ़ा संचार उपलब्ध कराता है। यह भू-तुल्यकालिक उपग्रह आई-2के बस पर विकसित किया गया है। जीसैट-3 74o पू रेखांश पर मेटसैट (कल्पना-1) और इन्सैट-3सी के साथ सह-स्थित है।
मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में इसरो के निदेशक श्री एच. रायप्पा से मुलाकात की और नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप गतिविधि
आधारित शिक्षा पर इसरो के सहयोग से सैटेलाइट (एजुसैट) के माध्यम से शिक्षा पर चर्चा की । साथ ही उच्च शिक्षा के सशक्तिकरण और प्राकृतिक आपदाओं के पूर्वानुमान के लिए टू वे एक्सचेंज चैनल के निर्माण पर चर्चा की गई। गोवा सरकार की इस पहल से गोवा के विद्यार्थिओं को काफी लाभ पहुंचेगा।
शैक्षिक उपग्रह अंग्रेजी के शब्द Education Satellite का हिंदी रूपांतर है, जिसका संक्षिप्त रूप एडूसैट (EDUSAT) है। एडूसैट का मुख्य उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रो में रहने वाले विदयार्थियों के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना है ,जिन्हें औपचारिक शिक्षा की सुविधा नही प्राप्त हो पाती है. यह शिक्षा उन लोगो के लिए काफी लाभदायक है को किसी वजह से विद्यालय जाने में असमर्थ है । लोगो तक सरल शिक्षा पहुचाने में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अंतरिक्ष (इसरो ) में अपनी प्रगति और उपलब्धियों से हमारा मनोरंजन करने में कभी असफल नहीं हुआ है। इसरो ऐसे उपग्रह विकसित करता है जो अनुप्रयोग-विशिष्ट होते हैं और राष्ट्र के लिए उपकरण के रूप में कार्य करते हैं, जो प्रसारण, मौसम पूर्वानुमान, संचार, कार्टोग्राफी, नेविगेशन, टेलीमेडिसिन, दूरस्थ शिक्षा उपग्रह हैं। ऐसा ही एक उपग्रह EDUSAT है, जो दूरस्थ शिक्षा प्रणालियों पर केंद्रित है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा लॉन्च किया गया पहला शैक्षिक उपग्रह है।
EDUSAT, जिसे मूल रूप से GSAT – 3 कहा जाता है, 20 सितंबर 2004 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन द्वारा अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया एक संचार उपग्रह था। इस उपग्रह का प्राथमिक उद्देश्य प्राथमिक से लेकर हाई स्कूल तक के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए दूर की कक्षा में शिक्षा प्रदान करना था। शैक्षिक पृष्ठभूमि पर केन्द्रित यह भारत द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला पहला उपग्रह था। यह भारत सरकार द्वारा अत्यधिक सराहनीय कदम था, यह विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। EDUSAT में INSAT की तुलना में अलग-अलग विशेषताएं हैं, इसमें एक मल्टीमीडिया सिस्टम, ऑडियो-विजुअल माध्यम और डिजिटल क्लासरूम हैं।
EDUSAT कार्यक्रम के तीन चरण हैं। वे पायलट, सेमी ऑपरेशनल और ऑपरेशनल हैं। पायलट प्रोजेक्ट 2004 के दौरान 300 से अधिक टर्मिनलों के साथ कर्नाटक, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में चलाया गया था। पायलट प्रोजेक्ट में प्राप्त अनुभवों को अर्ध-परिचालन चरण में अपनाया गया था। परिचालन चरण में भारत भर के अधिकांश जिलों को एजुसैट कार्यक्रम के तहत कवर किया गया था। परिचालन चरण के दौरान इन नेटवर्कों को और अधिक विकसित और विस्तारित किया गया, जिसे उनकी संबंधित राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित किया गया था।
EDUSAT नेटवर्क में दो प्रकार के टर्मिनल हैं, सैटेलाइट इंटरएक्टिव टर्मिनल (SIT) और रिसीव ओनली टर्मिनल (ROT)। दिसंबर 2012 तक, कुल 83 नेटवर्क स्थापित किए गए हैं, जो लगभग 56,164 स्कूलों और कॉलेजों को जोड़ते हैं, जो 4,943 एसआईटी और 51,221 आरओटी हैं। इसमें 26 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल थे। EDUSAT कार्यक्रम से हर साल लगभग 15 मिलियन छात्र लाभान्वित हो रहे हैं।
पाठ्यक्रम और अन्य जानकारी की लिए : https://www.iirs.gov.in/EDUSAT-News

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